रायगढ़. रेल लाईन की जद में आने से प्रभावित क्षेत्र के वनोपज संग्रहण करने वालो पर दोहरी मार पड़ रही है। उनके आजीविका का पहला साधन वनोपज संग्रहण खत्म हो गया है। जिसका सीधा असर उनके जीवन यापन पर पड़ रहा है।
एनटीपीसी के लिए कोयला परिवहन के लिए बिछाई जा रही रेल लाईन से प्रभावितों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टोरेट का घेराव किया। रेल लाईन से एकताल, बड़माल, ठेंगापाली, रेंगालपाली व कोसमपाली के मजदूर सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। कलेक्टोरेट पहुंचे इन ग्रामीणों का आरोप है कि रेल लाईन की वजह से सीधा असर तेंदूपत्ता संग्रहण पर पड़ा। जबकि उनकी आजीविका का मुख्य साधन वनोपज था। दरअसल एनटीपीसी लारा प्रोजेक्ट के लिए तिलाईपाली से कोयला परिवहन करने के लिए रेल लाईन बिछाई जा रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण किया गया है और रेल लाईन निर्माण के लिए व्यापक पैमाने पर पेड़ों की कटाई गई है। इसका सीधा असर तेंदूपत्ता संग्रहकों व वनोपज पर आश्रित ग्रामीणों पर पड़ा है। इन लोगों ने बताया कि रेल लाईन के निर्माण में आड़े आ रहे व्यापक पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। दरअसल उनका जीवन यापन मजदूरी के साथ वनोपज संग्रहण पर आश्रित रहा है जो अब खत्म हो चुका है। इस वजह से अब उनके जीवकोपार्जन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसके पहले भी वे वनोपज संग्रहण खत्म हो जाने के बाद वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं वे ऐसी कोई विकल्प की मांग कर रहे हैं जिससे वनोपज पर आश्रित रहने वाले ग्रामीण मजदूरों को जीवकोपार्जन का दूसरा साधन मिल सके और वनोपज संग्रहण का काम छिन जाने का विकल्प मिल सके। एकताल, बड़माल, ठेंगापाली, रेंगालपाली, कोसमपाली से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मजदूर महिला पुरूष पहुंचे थे। इनमें प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश साफ तौर पर देखा गया।
किया जाएगा उग्र प्रदर्शन
ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार प्रशासन को इस आशय को लेकर अवगत करा चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। जिससे उन्हें कोई राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन के हितों के लिए कोई आवश्यक कदम नहीं उठाती है तो उग्र धरना प्रदर्शन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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