भोपाल। प्रदेश में आवासीय उपयोग के लिए दी गई नजूल की जमीन के पट्टों के नवीनीकरण के लिए अब नए नियम बनेंगे। मौजूदा नियम की पेचीदगियों से प्रदेशभर में सैकड़ों आवासीय कॉलोनियों के रहवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भोपाल के संभागायुक्त अजातशत्रु ने राजस्व विभाग को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांग लिया है। लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए राजस्व विभाग ने नियम बदलने का मसौदा बनाकर वित्त विभाग की राय लेने के लिए भेज दिया है।
सूत्रों के मुताबिक नवीनीकरण के नियमों में व्यक्तिगत पट्टों को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। दरअसल, सरकार ने आवासीय उपयोग के लिए कई गृह निर्माण सहकारी समितियों को भूमि 30 साल के पट्टे पर आवंटित की है। समिति ने सदस्यों को भूखंड आवंटित कर दिए।
30 साल की मियाद खत्म होने पर पट्टे का नवीनीकरण होना चाहिए। इसमें व्यावहारिक परेशानियों को देखते हुए राजस्व विभाग ने 2011 में परिपत्र जारी किया था, लेकिन उससे स्थिति सुलझने की जगह और उलझ गई।
बताया जा रहा है कि व्यक्तिगत भूखंड का नवीनीकरण कैसे होगा, इसको लेकर नियम साफ नहीं है। साथ ही यदि किसी ने आवासीय भूखंड का उपयोग व्यावसायिक कर लिया तो बाकी सदस्यों के पट्टों के नवीनीकरण का क्या होगा। मध्य रेलवे गृह निर्माण समिति भोपाल का यही मामला है। समिति ने नवीनीकरण के लिए आवेदन दिया, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी नवीनीकरण नहीं हो पाया।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भी नवीनीकरण में समस्या आने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि कई जगह यह शिकायतें आई हैं कि आवासीय उपयोग के लिए दिए भूखंडों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग हो रहा है। नवीनीकरण की फीस भी ज्यादा है।
यदि नवीनीकरण की तारीख निकल गई तो 50 फीसदी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसको लेकर भी रहवासी विरोध कर रहे हैं, क्योंकि कुछ लोगों की वजह से कॉलोनी के बाकी रहवासियों के पट्टे का नवीनीकरण रुक जाता है।
ऐसे मामलों से कैसे निपटा जाए, इसको लेकर कमिश्नरों ने भी मार्गदर्शन मांगा है। विधानसभा के बजट सत्र में भी नवीनीकरण का मुद्दा उठ चुका है। इसे देखते हुए नए नियम का मसौदा बनाकर वित्त विभाग को भेज दिया है। वित्त विभाग की राय मिलते ही प्रक्रिया को सरल करते हुए नए नियम जारी कर दिए जाएंगे।
जल्द बनेंगे नए नियम
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अरुण पांडे ने बताया कि पट्टों के नवीनीकरण के नए नियम जल्द ही अंतिम रूप मिलेगा। वित्तीय मामला होने की वजह से वित्त विभाग से राय मांगी गई है।
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