Friday, 29th August 2025

इसलिए नहीं हो पाया है कॉलेजों में कोर्स पूरा, अभी तक सिर्फ 30 फीसदी पढ़ाई

Mon, Dec 18, 2017 7:41 PM

भोपाल। प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति अब तक पटरी पर नहीं आ सकी है। ज्यादातर सरकारी कॉलेजों में अब तक केवल 30-35 फीसदी कोर्स ही पूरा हो पाया है। करीब 70 फीसदी कोर्स अब भी अधूरा है। अगर इसी गति से अध्यापन कार्य होता रहा तो मार्च तक भी कोर्स पूरा नहीं हो पाएगा।

 

कॉलेजों में पढ़ाई पिछड़ने की मुख्य वजह समय से अतिथि विद्वानों की भर्ती नहीं हो पाना है। दिसंबर की शुरुआत तक ऐसी ही स्थिति बनी हुई थी। गौरतलब है कि प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में करीब साढ़े चार हजार अतिथि विद्वानों की व्यवस्था की जानी थी, जो पूरी तरह से अब तक नहीं हो सकी है।

रही-सही कसर चुनाव ने पूरी की

कॉलेजों में आधे-अधूरे कोर्स की एक वजह छात्र संघ चुनाव भी रही। पहले सरकारी कॉलेजों में चुनाव हुए और उसके बाद नवंबर में निजी कॉलेजों में चुनाव संपन्न हुए। इस दौरान सरकारी कॉलेजों के प्रोफसर्स की ड्यूटी भी चुनाव अधिकारी के रूप में लगा दी गई। इस दौरान करीब एक महीना सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई ठप रही।

वार्षिक परीक्षा का उल्टा असर

सरकार ने चालू शिक्षा सत्र में सेमेस्टर सिस्टम को समाप्त कर वार्षिक परीक्षा पद्धति लागू की थी। इसके पीछे सोच यह थी कि सेमेस्टर के कारण छात्रों का रिजल्ट खराब होता है और वार्षिक परीक्षा को वे बेहतर ढंग से दे सकते हैं। लेकिन, हुआ इसका उल्टा। प्रथम वर्ष में सेमेस्टर खत्म होने के बाद पढ़ाई लगभग ठप ही हो गई। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि अगले हफ्ते से प्रोफेसर्स क्रिसमस की छुट्टी पर चले जाएंगे। छात्र भी कॉलेजों में कम ही पहुंचते हैं। ऐसे में साल भर का कोर्स दो-ढाई महीने में पूरा कैसे किया जा सकता है? अतिथि विद्वानों को रखे जाने की प्रक्रिया भी हाल में ही हुई है। ऐसे में वे भी कोर्स पूरा नहीं करवा पाएंगे। सबसे ज्यादा परेशानी दूरस्थ क्षेत्रों में है। जहां पर्याप्त संख्या में प्रोफेसर्स नहीं हैं। अतिथि विद्वानों को रखे जाने में भी विवाद की स्थिति बनी थी। वे भी समय पर कॉलेजों में नहीं रखे जा सके। ऐसे में कोर्स ही पूरा नहीं हो पाया।

चुनाव में समय खराब हुआ

इस बार दो-दो बार छात्र संघ चुनाव हुए। प्रोफेसर्स की ड्यूटी लगाई गई, जिससे पूरा महीना ऐसे ही गुजर गया। अतिथि विद्वान कॉलेजों में समय पर नहीं रखे गए। सोचने वाली बात है कि जो कोर्स 8 महीने में पूरा होना चाहिए, उसे दो महीने में कैसे करवाया जाएगा - प्रो.कैलाश त्यागी, अध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ

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