भोपाल। राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों बाघ भ्रमण कर रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर बाघ के हमले की घटनाएं भी हुई हैं। अगर कभी बाघ या कोई अन्य हिंसक वन्य प्राणी से आमना-सामना हो जाए तो शोर मचाएं। पास में माचिस हो तो आग जलाएं और जंगल में पिकनिक मनाने न जाएं। गुरुवार को वन विभाग की ओर से चार इमली के गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यशाला में वन्य प्राणी विशेषज्ञों ने ये सुझाव दिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि वन्य प्राणियों से मुठभेड़ के कई कारण हो सकते हैं। जानवर के खाने-पीने, सहवास या बच्चों के आसपास की उपस्थिति से वे हमला कर सकते हैं। वन्य प्राणी के अत्यंत नजदीक जाने पर वे आक्रमक होकर हमला कर देते हैं। सामान्य अवस्था में बाघ को छेड़ने पर भी वह हमला कर देता है। बाघ से आमना-सामना न हो इसके लिए सभी को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई उनके इलाके में न जाए। अगर भूलवश बाघ के इलाके में गए हैं और उससे सामना हो जाए तो उसके सामने असामान्य व्यवहार न करें। उसके क्रियाकलापों पर ध्यान दें और बचाव के प्रयास करें। अगर किसी जानवर की मृत्यु हुई हो, तो भी अकेले जंगल में न जाएं। वन अधिकारी को इस संबंध में सूचित करें। अगर ऐसा संभव न हो तो कई लोग इकट्ठा होकर हो-हल्ला करें, ताकि जानवर दूर चला जाए और किसी अनहोनी को रोका जा सके। संभव हो तो पटाखे चलाएं।
लोगों को दी जाएगी बाघ के इलाके की जानकारी
कार्यशाला में तय हुआ कि आम लोगों और ग्रामीणों को बाघ के इलाके की जानकारी दी जाए। साथ ही उन्हें बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। बाघ और वन्य प्राणी स्वतंत्र परिवेश चाहते हैं, इसलिए उनके क्रियाकलाप में किसी प्रकार का दखल न दें। कार्यशाला में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ जितेंद्र अग्रवाल, कंजरवेटर एसके तिवारी, एसडीओ एसएस भदौरिया और वन्य प्राणी विशेषज्ञ विद्या वेंकटेशन आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
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