निराशा से बचना चाहिए और हर हाल में अपनी सोच सकारात्मक बनाए रखनी चाहिए। यही सुखी और सफल जीवन के जरूरी है। जो लोग बुरे हालातों में नकारात्मक सोचने लगते हैं, उनके जीवन में समस्याएं और ज्यादा बढ़ने लगती हैं। बुरे समय को दूर करने के लिए धैर्य बनाए रखें और नकारात्मकता से बचें।
धैर्य और सकारात्मक सोच से ही बुरे से बुरे समय को दूर किया जा सकता है। ये बात हर व्यक्ति पर लागू होती है। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक संत अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध थे। संत अपनी बुद्धिमानी से सभी की समस्याओं को निवारण कर देते थे। गांव के लोग रोज संत के उपदेश सुनने पहुंचते थे। उनके आश्रम में कई शिष्य धर्म का ज्ञान प्राप्त कर रहे थे।
एक दिन संत का एक भक्त आश्रम पहुंचा और उसने गाय दान में दी। गाय देखकर सभी शिष्य बहुत खुश हो गए। शिष्यों ने सोचा कि अब हमें रोज ताजा दूध पीने को मिलेगा। ये बात शिष्यों ने अपने गुरु को बताई तो गुरु ने कहा, 'चलो अच्छा है। अब सभी को पीने के दूध मिलेगा।'
कुछ दिनों तक संत और उनके शिष्य दूध पीते रहे। लेकिन एक दिन वह दानी व्यक्ति अपनी गाय वापस लेने आ गया। संत ने उसे उसकी गाय लौटा दी। ये देखकर सभी शिष्य दुखी हो गए।
गुरु ने कहा, 'निराश होने की जरूरत नहीं है। अब हमें अब गाय का गोबर और गंदगी साफ नहीं करना पड़ेगी। इससे हमारा समय बचेगा और हम तप और ध्यान ज्यादा समय तक कर सकेंगे। सभी शिष्य भी अपना अध्यापन ठीक से कर पाएंगे।'
शिष्यों ने पूछा, 'गुरुजी आपको इस बात से दुख नहीं हुआ कि अब हमें ताजा दूध नहीं मिलेगा।
गुरु बोले, 'हमें हर हाल में सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। यही सुखी और सफल जीवन का रहस्य है। अगर हम निराश हो जाएंगे तो जीवन में अशांति और दुख बढ़ने लगेंगे।
जब गाय मिली तब भी हम बहुत ज्यादा खुश नहीं हुए और जब चली गए तब भी हम निराश नहीं हुए। इसमें भी हम सकारात्मक रहे। गाय की वजह से आश्रम में गंदगी हो रही थी, उसे साफ करने में भी सभी शिष्यों का काफी समय निकल जाता था। अब सभी शिष्यों को पढ़ाई के भरपूर समय मिल जाएगा।'
सीख- जो लोग बुरे समय में भी सकारात्मकता ढूंढ लेते हैं, वे कभी भी अशांत नहीं होते हैं और हमेशा प्रसन्न रहते हैं।
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