Wednesday, 4th March 2026

मप्र के बासमती पर दाे मुख्यमंत्री आमने-सामने:अमरिंदर से शिवराज ने पूछा- मप्र के किसानाें से पंजाब की क्या दुश्मनी

Fri, Aug 7, 2020 3:42 PM

मप्र के बासमती चावल की जीआई टैगिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने आ गए हैं। बुधवार को कैप्टन ने बासमती की जीआई टैगिंग काे लेकर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार काे पत्र लिखा था। गुरुवार काे शिवराज ने इसका जवाब दिया। उन्हाेंने कैप्टन से पूछा कि कांग्रेस सरकार काे मप्र के किसानाें से क्या दुश्मनी है। मप्र में बासमती की पैदावार के बरसों पुराने दस्तावेज हैं। फिर भी जीआई टैग का विरोध अनुचित है। शिवराज ने प्रधानमंत्री काे पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामला मप्र या पंजाब का नहीं, पूरे देश के किसान और उनकी आजीविका का विषय है।

जहां तक बात पाकिस्तान की है तो उनके साथ कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के मामले का मप्र के दावों से कोई संबंध नहीं है। क्योंकि यह भारत के जीआई एक्ट के तहत आता है और इसका बासमती चावल के अंतर्देशीय दावों से कोई जुड़ाव नहीं है।

मप्र ने पक्ष में दिए तर्क

  • पंजाब-हरियाणा के बासमती निर्यातक मप्र से बासमती चावल खरीद रहे हैं।
  • केंद्र सरकार 1999 से मप्र को बासमती के ‘ब्रीडर बीज’ की आपूर्ति कर रही है।
  • ‘सिंधिया स्टेट’ के रिकॉर्ड में अंकित है कि 1944 में प्रदेश के किसानों को बीज मिले थे।
  • हैदराबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ राइस रिसर्च ने अपनी ‘उत्पादन उन्मुख सर्वेक्षण रिपोर्ट’ में दर्ज किया है कि मप्र में पिछले 25 वर्ष से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है।

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